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August 26, 2012

पतझर में


पतझर में
बैठा उघारे तन
सूना जंगल।

-शम्भूदयाल सिंह ‘सुधाकर’
[हाइकु-१९८९ से साभार]

किरण–छड़ी


किरण–छड़ी
उठाकर निकला
जेठ–सूरज ।

-शम्भूदयाल सिंह ‘सुधाकर’
[हाइकु-१९८९ से साभार]

फागुन आया


फागुन आया
अँगारे शीश रख 
टेसू दहका ।

-शम्भूदयाल सिंह ‘सुधाकर’
[हाइकु-१९८९ से साभार]