May 8, 2015

व़क्त के ज़ख्म

व़क्त के ज़ख्म
प्रस्तर भी छलनी
मूक कथन

-शिवमूर्ति तिवारी
[फेसबुक हाइकु समूह से]

1 comment:

Rama said...

बहुत सुन्दर हाइकु ....